• ।। सब भगवान की मर्जी से होता है ।।
    Jun 1 2026

    * बईमानी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए


    * प्रारब्ध तो तय है, परंतु, तुम्हारी नियत, तुम्हारा प्रयत्न, तुम्हारा भाव और प्रारब्ध यह आपस में टकराते हैं

    Show More Show Less
    4 mins
  • ।। भगवान के बारे में, स्वामी रामसुखदास जी ।।
    May 29 2026

    ।। भगवान के बारे में, स्वामी रामसुखदास जी ।।

    Show More Show Less
    21 mins
  • ।।सेवा की दृष्टि से कर्तव्य, भजन है।।
    May 28 2026

    कर्तव से भगवान की सेवा करो |

    Show More Show Less
    7 mins
  • ।। जीवन का उद्देश्य।।
    May 20 2026

    * भगवत प्राप्ति का उद्देश्य होना जीवन की सबसे महत्वपूर्ण बात है


    * फिर उनका स्मरण अपने आप ही बना रहेगा

    Show More Show Less
    9 mins
  • ।। परम प्रभु अपने ही में पायो।।
    May 20 2026


    * स्वामी रामसुखदास जी का पद, वाणी


    * गुरुदेव जी की वाणी

    Show More Show Less
    36 mins
  • ।। नए-नए कर्मों का आरंभ मत करो ।।
    May 20 2026

    * जब तक राजसिकता की प्रधानता रहती है तब तक नए-नए कर्म, और ज्यादा फायदा का उद्देश्य रखकर किए जाते हैं


    * जब तक नए-नए कर्मों में ही उलझोगे तो जीवन में सुलझोगे कब


    * जो " तुम " हो तुम तो शुद्ध ही हो, तुम्हें बस अभी समझ नहीं आ रहा कि तुम शुद्ध ही हो


    * जप करते रहो, वह फिर स्मरण बन जाएगा, फिर उनकी कृपा से प्रेम हो जाएगा

    Show More Show Less
    27 mins
  • ।। और क्या कहूँ ।।
    May 19 2026

    * कहते कहते 50 साल से ज्यादा हो गए कहने की हद भी तो आनी चाहिए


    * प्रश्न : आत्मज्ञानी की क्या पहचान है


    * कोई नहीं पहचान सकता, क्योंकि हर एक आदमी उतना ही पहचान सकता है जितने पहचाननें कि उसमें क्षमता है, और आत्मज्ञानी का कोई बाह्य चिन्ह नहीं होता


    * जो ऐसा प्रदर्शन करे कि मुझे आत्मज्ञान हो गया, तो वह शक होना चाहिए


    * सत्संग केवल हमारे देश में होता है


    * सच्चे गुरु केवल भगवान है


    * गुरु मिलना कठिन नहीं है, शिष्य बनना कठिन है


    * मार्ग कठिन नहीं है, तुम में चलने का दम नहीं है


    * करलो, वर्ना मरते हुए बहुत पश्चाताप होगा

    Show More Show Less
    43 mins
  • ।। गीता प्रेस के संस्थापक संत ।।
    May 18 2026

    * साधक संजीवनी की महत्ता


    * स्वामी रामसुखदास जी से वार्तालाप, उनके अनेक किस्से


    * हनुमान प्रसाद पोद्दार जी

    Show More Show Less
    33 mins